Sunday, July 15, 2012
Monday, July 9, 2012
Niyati

तुम्हारा मेरा यही क्षितिज था इन्द्रधनुष का दूसरा छोर पथ की इस द्विशाखा से अब तुम एक ओर, मैं इक ओर पीछे छूटी उग्र वो लहरें किनारे बाँधी...

09 Jul 2012
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