रास्तों और मंज़िलों का फ़र्क मिटा दिया सहर-ओ-शब को इस तरह मिला दिया नफ़ा-नुक्सान कैसा? क्या, किसने दिया? इसी जमा-जोड़ में रात दिन लगा दिया च...
To the Moon (चाँद तक)
आरज़ू और इल्तिज़ा का बस इतना फ़साना है एक सांस का आना, एक सांस का छूट जाना है तुम्हें गुरूर हो अपनी संगदिली का बेशक़ हमें ना-गवारा एक आह का नि...
Four (चार)
ना रंज किसी से, किसी की उल्फ़त भी नहीं रोका मुझे किसी मेहरबाँ की बाहों ने नहीं महकती साँसे नहीं, किसी आरिज़ की शुआएं नहीं मेरी आँखों को ...
जाने से पहले (Before Leaving)
"वक़्त हो चला है, सामान कब से बांधे रखा है? क्या देर है? उठती क्यों नहीं? क्यों बार-बार इन दीवारों को देखे जा रही हो? यह दीवारें साथ नही...
अग्नि-वर्षा (Rain of Fire)
अनायस, मुक्ति का आभास सहज साहस, उन्मुक्त श्वास अविरल विचार, स्वतंत्र सरिता भँवरे की गुंजन, सरल कविता है यथार्थ, या मात्र एक भ्रम स्वपन ...
मरघट के उत्सव (The Celebration)
नित्य नवीन काया सजाए राम नाम का कीर्तन गाये जन - परिजन संग लिये परिधान,श्रृंगार रंग किये अनुष्ठान रात-दिन रचते हैं मरघट के उत्सव कहते हैं ...
The Dog Bite (कुत्ते का काटना)
कहानी छोटी सी - स्पष्ट एवं सरल हिंदी में ! अगर आप एक बच्चे के माता पिता या अभिभावक हैं और आपके किसी जानकार का कुत्ता आपके बच्चे पर झपटता ह...
Hashiye Tak Ka Safar (हाशिये तक का सफ़र)
A friend made the following post titled ‘Yaas’ on her blog. Check the blog HERE मैं सदा तेरी किताब के हाशिये में ही रहा हूँ मुखपृष्ठ पर, ...
Mansooba (मंसूबा)
हुआ करे लाख़ मुख़ातिब, हमसे लोग ज़माने में करें ख़ैरियत - ख़्याल बेशक़, दिन-रात, आने-जाने में दरकार सबकी अपनी है, अदब-सलाम बजाने में यूँ ही नही...
Aur Nahi Hota (और नहीं होता)
नज़रों से ज़्यादा आज़ाद-गुफ़्तार नहीं कोई यह वो कहती है जो ज़बान से बयान नहीं होता होगा कौन और दर्द सा वफादार इस ज़माने में साथ यह निभाता है जब ...
Yun Hi Sahi (यूँ ही सही)
ना सही मेरा ईमान काबे कलीसा में हुआ मैं गर तो क्या, क़ाफ़िर ही सही मेरे हर दिन, हर पल में शामिल तू तेरे लिए चाहे मैं रहा अजनबी ही सही किसी ...
Rafoogar (रफ़ूगर)
कुछ स्याह और हो यह शब तो सुकून मिले तेरी हसरतों से फिर मुझे नया जूनून मिले मेरी दीवानगी, मेरी तिश्नगी की नज़र हुई कहूँ तुम से भी अब क्या, कि...
मेरी मीरा तुम (Meri Meera Tum)
क्षणिक मृत्यु का वरदान तुम्हारा भाग्य कब था ? तुम्हें तो प्रत्येक पल सहस्रों बार मरना था किसी अविरल वेग संग अनायस विलुप्त होना शायद सौभाग्य...
Achchaa Hai…
सलीब अपने सर उठा चलना कहाँ मुझे रास था तेरे जूनून की चादर से मगर फिर भी यह हल्का है मेरे सर पर छत ना सही, बे-शक़ फाका-मस्ती ही सही आज तेरी ...
Zara Sa Faaslaa…
कुछ देर शब और जला अभी तो सिर्फ़ आग़ाज़ है चाँद कुछ और सुलगा नींद अभी नाराज़ है कहाँ मैं मयसर अभी कहाँ कोई सुरूर है कुछ खामोशी है मगर कुछ ...

Zindaa Hoon Main (ज़िंदा हूँ मैं)
Again something which I wrote years ago and which did not come to the fore for long. This has been on my website for a while but I guess ...
The “Karwachauth”
I lived by the end of a narrow street where the alley merged into a dim lit cross road. It was a locality of middle class service men who le...
Amrita Pritam’s Best - मैं तैनू फिर मिलांगी
This is one of the finest pieces I ever came across. The imagery is sublime and divine at the same time. Heart wrenching and yet as beautif...
Niyati
तुम्हारा मेरा यही क्षितिज था इन्द्रधनुष का दूसरा छोर पथ की इस द्विशाखा से अब तुम एक ओर, मैं इक ओर पीछे छूटी उग्र वो लहरें किनारे बाँधी...
A Letter to Write…और अनकही
Never thought this would make it from the drafts..It just seemed better after I read it last night than the time when I wrote it. Interestin...